Apple का नया ड्यूल-डिस्प्ले फ्लैगशिप, iPhone Duo, इस समय टेक जगत में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। भारत में ₹2,99,900 की शुरुआती कीमत देखकर खरीदार हैरान हैं। सोशल मीडिया पर यूजर Apple पर भारतीय ग्राहकों से जरूरत से ज्यादा पैसे वसूलने का आरोप लगा रहे हैं। पहली नजर में ऐसा लगना स्वाभाविक भी है, लेकिन संख्याओं की गहराई में जाने पर एक बिल्कुल अलग तस्वीर सामने आती है।

₹3 लाख की कीमत का सच: iPhone Duo पर इतना भारी टैक्स क्यों लगा रही है सरकार?
सच्चाई यह है कि Apple ने इस फोन की बेस प्राइस भारत के लिए नहीं बढ़ाई है; इस भारी-भरकम कीमत का असल कारण भारत का जटिल इंपोर्ट टैक्स स्ट्रक्चर है।
लोकल मैन्युफैक्चरिंग नहीं, इसलिए भारी कस्टम ड्यूटी
Apple ने भले ही भारत में बेसिक और प्रो मॉडल्स की असेंबलिंग शुरू कर दी हो, लेकिन iPhone Duo जैसे अल्ट्रा-प्रीमियम और नए फॉर्म-फैक्टर वाले डिवाइस पूरी तरह विदेशों से आयात (CBU – Completely Built Unit) किए जा रहे हैं।
जब कोई फोन भारत में असेंबल न होकर सीधे बाहर से इंपोर्ट होता है, तो उस पर भारी टैरिफ लागू होते हैं:
- 28% बेसिक कस्टम्स ड्यूटी (BCD) और सेस: विदेशों से आने वाले लक्जरी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर सरकार लगभग 28% का आयात शुल्क लगाती है।
- 18% गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST): कस्टम्स ड्यूटी लगने के बाद फाइनल वैल्यू पर 18% का फ्लैट जीएसटी जोड़ा जाता है।
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गणित समझिए: टैक्स हटने के बाद कितना बचता है?
यदि आप iPhone Duo के ₹2,99,900 के भारतीय रिटेल प्राइस से टैक्स की परतें हटाएंगे, तो वास्तविक लागत सामने आ जाएगी:
- भारत में फाइनल रिटेल कीमत: ₹2,99,900
- 18% GST हटाने के बाद (-₹45,747): ₹2,54,153
- 28% इंपोर्ट ड्यूटी हटाने के बाद (-₹55,596): ₹1,98,557
टैक्स और कस्टम ड्यूटी हटाने के बाद इस डिवाइस की शुद्ध एक्स-फैक्ट्री लागत करीब ₹1,98,500 आती है। अमेरिकी बाजार में मिलने वाली प्री-टैक्स कीमत (करेंसी कन्वर्जन के हिसाब से लगभग $2,399) से तुलना करने पर यह अंतर न के बराबर रह जाता है।
दोष Apple का या टैक्स पॉलिसी का?
भारत में ₹3 लाख की कीमत में से करीब ₹1,01,343 सीधे सरकारी खजाने (टैक्स और ड्यूटीज) में जा रहे हैं। Apple अमेरिकी बाजार के मुकाबले भारत में कोई प्रीमियम चार्ज नहीं ले रहा है।
जब तक Apple ‘मेक इन इंडिया’ के तहत ऐसे जटिल फोल्डेबल या ड्यूल-स्क्रीन फोन की असेंबलिंग भारत में शुरू नहीं करता, तब तक भारतीय ग्राहकों को अमेरिकी टेक का मजा लेने के लिए अपनी जेब से 35% से 40% अतिरिक्त सरकारी टैक्स चुकाना ही पड़ेगा।